एक बच्चे की दर्द भरी पीड़ा ने शुरू करवाई हरिहर योजना
पूर्व मुख्यमंत्री तथा वर्तमान में केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल ने खोला राज, कैसे शुरू हुई हरिहर योजना

सत्य खबर हरियाणा
Harihar Yojana : जब भी सरकार कोई योजना घोषित करती है तो उसके पीछे लंबी बैठकों का दौर और उसमें हुई चर्चाएं और उसके बाद उसके प्लस और माइंस प्वाइंट्स देखकर योजना तैयार की जाती है, लेकिन हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री मनोहर लाल द्वारा तैयार की गई और शुरू की गई हरिहर योजना के पीछे ऐसा कुछ नहीं था।

पूरा देश जानता है कि मुख्यमंत्री पद पर रहते हुए मनोहर लाल ने हरियाणा में इस महत्वपूर्ण और महत्वाकांक्षी योजना को शुरू किया था लेकिन यह आज तक राज ही था कि आखिर यह योजना आई कैसे? केंद्रीय ऊर्जा मंत्री मनोहर लाल के मीडिया सलाहकार सुदेश कटारिया ने एक वीडियो अपने यूट्यूब पर शेयर किया है। इस वीडियो में खुद मनोहर लाल इस बात को बता रहे हैं कि इस योजना की शुरुआत कैसे हुई? मनोहर लाल यह भी बताते हैं कि वह पहली बार इस बात को सार्वजनिक कर रहे हैं कि इस योजना की शुरुआत कैसे हुई?
पूर्व मुख्यमंत्री व वर्तमान केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल ने हाल ही में एक सार्वजनिक मंच से इस योजना के जन्म की भावुक कहानी साझा की। वर्ष 2019 में सोनीपत में एक 24 वर्षीय अनाथ युवक से हुई मुलाकात ने उन्हें यह सोचने पर मजबूर कर दिया कि 18 वर्ष की आयु के बाद बालगृह से निकलने वाले बच्चों का क्या होगा। इसी एक सवाल ने व्यवस्था में बदलाव किया और ‘हरिहर’ योजना अस्तित्व में आई।
मनोहर लाल ने बताया कि 2019 में स्वतंत्रता दिवस कार्यक्रम से एक दिन पहले वे सोनीपत प्रवास पर थे। रात करीब 10 बजे एक 24 वर्षीय युवक उनसे मिलने पहुंचा, जो बचपन से बालगृह में पला-बढ़ा था। नियमानुसार 18 वर्ष का होने पर उसे संस्थान छोड़ना पड़ा था। बाहर उसका कोई परिवार नहीं था। युवक ने अपना दर्द बयां करते हुए कहा, ‘मेरी कोई पहचान नहीं है। मुझे अपने माता-पिता का पता नहीं। मैं अकेला नहीं हूं, ऐसे कई बच्चे हैं जो 18 साल के बाद व्यवस्था से बाहर हो जाते हैं।’ इस सवाल ने उस पूरी व्यवस्था को कटघरे में खड़ा कर दिया, जो बचपन में तो संरक्षण देती है, लेकिन युवावस्था की दहलीज पर बच्चों को बेसहारा छोड़ देती है।
युवक की इसी पीड़ा के बाद ‘हरिहर’ योजना का विचार सामने आया। इसका उद्देश्य केवल आर्थिक सहायता देना नहीं, बल्कि ऐसे बच्चों को शिक्षा, पुनर्वास, रोजगार और सम्मानजनक जीवन से जोड़ना तय किया गया। इस योजना के तहत बालगृह छोड़ने के बाद पात्र बच्चों को अगले सात वर्षों यानी 25 वर्ष की आयु पूरी होने तक सहायता दी जाती है। इस दौरान सरकार उनकी आगे की पढ़ाई, रहने की व्यवस्था, पुनर्वास और कौशल विकास में पूरा सहयोग करती है ताकि पारिवारिक सहारे के अभाव में कोई भी बच्चा पीछे न रहे। हरिहर योजना की सबसे बड़ी ताकत रोजगार की गारंटी है। इसके तहत पढ़ाई पूरी होने के बाद पात्र युवाओं को उनकी योग्यता के अनुसार ग्रुप-सी और ग्रुप-डी (तृतीय एवं चतुर्थ श्रेणी) के पदों पर नौकरी देने का सीधा प्रावधान किया गया है। सरकार का लक्ष्य युवाओं को केवल भरण-पोषण तक सीमित न रखकर उन्हें पूरी तरह आत्मनिर्भर बनाना है।
इस पूरी पहल का सबसे प्रेरक पहलू यह है कि जिस युवक के दर्द से इस योजना की नींव रखी गई, आज उसकी अपनी जिंदगी पूरी तरह बदल चुकी है। मनोहर लाल ने बताया कि उस युवक को रोजगार मिला, उसका विवाह हुआ और अब वह एक सामान्य व खुशहाल पारिवारिक जीवन जी रहा है। यह योजना महज एक सरकारी सहायता नहीं, बल्कि इस सोच का प्रतीक है कि संरक्षण का अर्थ केवल बचपन सुरक्षित करना नहीं, बल्कि युवाओं को आगे बढ़ने के अवसर देना भी है।
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